Oct 15, 2020

शिव मंदिर कोपबेड़ा,कोंडागांव |shiv mandir kopabeda,kondagaon

महाकालेश्वर शिव मंदिर कोपबेड़ा शिवानंद आश्रम कोंडागांव 

कोंडागांव से 3-4  km की दुरी पर स्थित है कोपाबेड़ा महाकालेश्वर शिव मंदिर और आश्रम जो की बहुत पुराना है। चारों तरफ से खेतों से घिरा हुआ यह मंदिर अत्यंत शांत जगह पर है। इस मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है साथ में ही भगवान विष्णु तथा गणेश जी और हनुमान जी व बुद्धा का मूर्ति रखा गया है। महाशिवरात्रि तथा नवरात्री पर्व के समय यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

महाकालेश्वर शिव मंदिर कोपबेड़ा शिवानंद आश्रम कोंडागांव
 महाकालेश्वर शिव मंदिर कोपबेड़ा शिवानंद आश्रम कोंडागांव 

कोंडागांव के आस पास देखने के लिए ये एक अच्छी जगह है। इस मंदिर के आस पास घूमने के लिए मात्र 2 किमी की दुरी पर ही नारियल पार्क व नारंगी नदी है। 

  

Sep 19, 2020

तीरथ शिव मंदिर उमरगांव कोंडागांव | shiv mandir umargaon kondagaon

तीरथ शिव मंदिर उमरगांव कोंडागांव 

उमरगांव स्थित शिव मंदिर कोंडागांव से 20 km दूर उमरगांव से कुलझर रोड पर स्थित है। ग्रामीण इस मंदिर को तिरिथ शिव मंदिर के नाम से जानते है। मंदिर के अंदर एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है। महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर में मेला का आयोजन किया जाता है तथा श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। नदी के किनारे बसा यह मंदिर अत्यंत शांत एवं जंगलों से घिरा हुआ है। मंदिर के पीछे एक नदी बहती है इस नदी के किनारे चार शिवलिंग रखा गया है। बरसात के समय ये जगह एक अच्छा पिकनिक स्पॉट है पर गर्मी के दिनों में यह नदी सुख जाती है। 

तीरथ शिव मंदिर उमरगांव कोंडागांव | shiv mandir umargaon kondagaon
शिवलिंग 


तीरथ शिव मंदिर उमरगांव कोंडागांव | shiv mandir umargaon kondagaon
नदी किनारे स्थापित शिवलिंग 


Aug 16, 2020

भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण्य कबीरधाम छत्तीसगढ़ | bhoramdev wildlife sanctuary kabirdham chhattisgarh

भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ भारत कई मायनों में छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों का चेहरा है और पर्यटकों द्वारा विशेष रूप से पसंद किया जाता है। भोरमदेव अभयारण्य मैकल की हरी-भरी वादियों में फैला हुआ है। 352 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र में फैला हुआ यह अभ्यारण अपने में अनेक प्राकृतिक विशेषताओं को समेटे हुए है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अचानकमार टाइगर रिजर्व दोनों को संरक्षण भी प्रदान करता है। 

bhoramdev wildlife sanctuary kabirdham chhattisgarh

भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ के बारे में पूरी जानकारी :-

भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ :-

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वर्ष 2001 में भोरमदेव अभयारण्य बनाया गया। तब नए राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ का गठन हुआ था। चिल्फी घाटी के साथ ही कान्हा नेशनल पार्क का भी एक बढ़ा बफर जोन नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में आ गया। चूँकि भोरमदेव और चिल्फी का यह क्षेत्रकान्हा नेशनल पार्क और अचानकमार के बीच पहले से ही एक कारीडोर के रूप में था। वन्यप्राणी की आवाजाही इधर से ही होती रही है। इसलिए वन्य प्राणियों की प्रजातियों में भी स्वाभाविक रूप से समानता पायी जाती है। इसका नामकरण भी यहाँ छत्तीसगढ़ का खजुराहो नाम से प्रतिष्टित भोरमदेव मंदिर के नाम पर ही अधिसूचित किया गया। 

प्रमुख वनस्पतियाँ :-

भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ में वनस्पतियों का निर्माण साल, साजा, तिनसा, कारा और हलुसी प्रजातियों से होता है। 

प्रमुख वन्यजीव :-

जीवों में ज्यादातर जंगली जानवर जैसे तेंदुआ, लकड़बग्घा, लोमड़ी, भालू, चीतल, जंगली भैंस, नीलगाय आदि शामिल हैं। अभयारण्य में बहने वाली सकरी नदी जंगली जानवरों के पीने के पानी का स्रोत है।

कैसे पहुंचे :-

अभयारण्य के निकटतम शहर कवर्धा का है। अभयारण्य रायपुर से 140 किमी दूर है। आप भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य कवर्धा से सड़कों द्वारा यात्रा कर सकते हैं जो फिर से रायपुर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में है।

जाने के लिए अच्छा समय :-

भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य का दौरा करने का सबसे अच्छा समय नवंबर और मार्च के बीच है। 

छत्तीसगढ़ के अन्य वन्यजीव संरक्षण स्थल :-


Jun 29, 2020

जतमई घटारानी मंदिर की पूरी जानकारी | jatmai ghatarani temple chhattisgarh

छत्‍तीसगढ़ में झरनों के बीच बसीं मां जतमई के दर्शन करने के लिए बरसात का मौसम सबसे बढ़िया रहता है. मां का ये मंदिर जंगल के बीचों-बीच बना हुआ है तथा बहुत ही सुन्दर है। अगर आप शहर के प्रदूषण से दूर कुछ दिन शांति और प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं तो इससे अच्‍छी और कोई दूसरी जगह हो ही नहीं सकती है।
जतमई घटारानी मंदिर की पूरी जानकारी | jatmai ghatarani temple chhattisgarh

जतमई घटारानी मंदिर की पूरी जानकारी 

जतमई मंदिर:-

जतमई छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 80 किमी की दूरी पर स्थित हैं। जतमई मंदिर के बाजू से ही नदी बहती है जो छोटा सा जलप्रपात बनाती है माता के मंदिर में हर साल चैत्र और कुंवार के नवरात्रों में मेले का आयोजन किया जाता है।

पटेवा के निकट स्थित जतमई जंगल क्षेत्र में फैला है। बरसात के दिनों में झरनों की रिमझिम फुहार इसे बेहतरीन पिकनिक की जगह बना देता है , यहाँ पर्यटक झरने का बहुत आनंद उठाते हैं|

जतमई मंदिर में उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि पर्व मनाया जाता है, यहाँ नवरात्रि की तरह विशेष उत्सव के मौकों पर एक सजावट देखतें बनता है। मानसून के बाद यहाँ जाने के लिए सबसे अच्छा समय है। मंदिर के निकट सुंदर झरना बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है झरना इस जगह को पूरे परिवार के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बना देता  है। पहुँचने के लिए गाड़ियां रायपुर से जतमई मंदिर के लिए आसानी से उपलब्ध हैं।

घटारानी मंदिर :-

जंगलों व पहाड़ों से घिरा हुआ घटारानी में भी बेहतरीन जल-प्रपात है। घटारानी मंदिर की भी बहुत मान्यता है। घटारानी प्रपात तक पहुंचना आसान नहीं है,यहाँ के रास्ते खतरनाक मोड़ से भरा हुआ है पर पर्यटकों के जाने के लिए पर्याप्त साधन हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए इन जगहों पर जाने का सबसे अच्छा समय अगस्त से दिसंबर तक है इस समय झरने में पानी रहता है ।

जतमई और घटारानी छत्तीसगढ़ के दो खूबसूरत जलप्रपात हैं, जो बरसात के मौसम में देखते ही बनते हैं। धार्मिक आस्था वाले लोगों के लिए यह तीर्थ भी है। यहां देवी मंदिर के साथ शिवलिंग भी है,यहां पहुंचने के लिए पक्की सड़कें हैं। 

Jun 24, 2020

गंगा मईया मंदिर झलमला बालोद | ganga maiya temple balod chhattisgarh

श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक, गंगा मईया मंदिर बालोद में स्थित है। यह मंदिर अब छत्तीसगढ़ राज्य में एक तीर्थ स्थल बन गया है। अखंड ज्योति कलश, हवन,नवरात्री पर्व ,मेला का आयोजनआदि अब गंगा मैया मंदिर की परंपरा बन गई है। नवरात्री पर्व के समय यहां भक्तों का ताँता लगा रहता है तथा मेला का आयोजन किया जाता है।
गंगा मईया मंदिर झलमला बालोद | ganga maiya temple balod chhattisgarh

गंगा मैया मंदिर के बारे में पूरी जानकारी 

गंगा मैया मंदिर :-

गंगा मैया मंदिर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बालोद से चार किलोमीटर की दूरी पर झलमला गाँव में स्थित है।। मूल रूप से, गंगा मैया मंदिर का निर्माण एक स्थानीय मछुआरे द्वारा एक छोटी सी झोपड़ी के रूप में किया गया था। कई भक्तों ने अच्छी मात्रा में धनराशि दान की जिससे इसे एक उचित मंदिर परिसर में बनाने में मदद मिली।

कैसे पहुंचे :-

चूंकि झलमला गांव बालोद-दुर्ग मार्ग पर स्थित है, इसलिए छत्तीसगढ़ के किसी भी जिले से बस की मदद से गंगा मैया मंदिर तक पहुंचना बहुत आसान व सुविधाजनक है।

Jun 23, 2020

छत्तीसगढ़ पीएससी प्रारंभिक 2020 परीक्षा की तैयारी cgpsc pre 2020 exam preparation

छत्तीसगढ़ पीएससी प्रारंभिक 2020 परीक्षा की तैयारी general knowledge,current affairs 2020
छत्तीसगढ़ पीएससी प्रारंभिक 2020 परीक्षा की तैयारी cgpsc pre 2020 exam preparation

राज्य के किसानों को छत्तीसगढ़ द्वारा चना उत्पादन को बढ़ाने के लिए वर्ष-2019-20 में 1500 रू. प्रति एकड़
के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

01 दिसंबर 2019 से 31 मई 2020 तक मक्का खरीदा जायेगा। प्रति एकड़ 10 क्विंटल मक्का खरीदी होगा।
इसका समर्थन मूल्य 1760 रू. है, जिसका लक्ष्य 5000 हजार मैट्रिक टन मक्का खरीदी का होगा।
छत्तीसगढ़ का रायपुर जिला जीएसटी रिटर्न रिपोर्ट 2019 के मामले में दूसरे स्थान पर है। जिसे प्रिंसिपल जनरल डायरेक्टर जनरल ऑफ इंटेलिजेंस विभाग द्वारा जारी किया गया है।

आदिवासियों एवं गरीब परिवारों को व्यवसाय प्रदान करने हेतु राजपेंटा, ऐर्राबोर ग्राम सुकमा जिले में उद्योग
नगर स्थापित किया जायेगा।

रावघाट एवं बलौदाबाजार के बीच 3300 करोड़ रूपये की लागत से 225 किमी. रेल लाइन परियोजना का निर्माण
किया जायेगा।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018-19 में राज्यों के लिए विकास दर जारी की गयी।.
जिसमें सबसे तेज विकास दर पश्चिम बंगाल का 12.58 प्रतिशत रही, और छत्तीसगढ़ का विकास दर 6.08
प्रतिशत रहा।

सेंटर फॉर, मनीटरिंग, इंडियन इकॉनामी द्वारा जारी बेरोजगारी रिपोर्ट में त्रिपुरा पहला स्थान एवं छत्तीसगढ़
को 8 वां स्थान प्राप्त हुआ।

बलरामपुर जिले के शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मॉडल कैरियर सेंटर के माध्यम से
परामर्श प्रदान करना एवं देश के विभिन्न प्रतिष्ठित उद्योगों में रोजगार प्रदान करना। इसका उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किया गया। जिसका लक्ष्य जिले के 5000 हजार युवाओं को रोजगार प्रदान.करना है।

छत्तीसगढ़ ऑटोमोबाइल सेक्टर 13 प्रतिशत वृद्धि के साथ देश में प्रथम स्थान पर है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश की पाँचवी औद्योगिक नीति 2019-24 जारी किया गया। जिसका समयसीमा 01 नवंबर 2019 से 31 अक्टूबर 2024 तक होगी।

प्रावधान
1. इस नीति के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों के विकाखण्ड को चार श्रेणी क्रमशः विकसित क्षेत्र, विकासशील क्षेत्र, पिछड़े क्षेत्र एवं अति पिछड़े क्षेत्रों में विभाजित किया गया।
2. विकसित क्षेत्र की श्रेणी के अंतर्गत 15 विकासखण्ड,विकासशील श्रेणी के अंतर्गत 25 ,पिछड़े क्षेत्र की 40 एवं अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों में 66 विकासखंड शामिल है। 
3. इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में खुलने वाले सभी उद्योगों में 100 फीसदी स्थानीय मजदुर होंगे। 

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार सबसे प्रदूषित शहर में मिलाई प्रथम, रायपुर द्वितीय रायगढ तृतीय स्थान पर है। 

राजकीय पशु वनभैंसा जुगाडू का निधन हो गया ।

छत्तीसगढ़ राज्य वन जीव बोर्ड अंतर्गत गुरू घासीदास राष्ट्रीय द्वारा कोरिया जिले के अंतर्गत गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को टाईगर रिज़र्व घोषित करने का निर्णय लिया। यह प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व होगा। 

 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क इस प्रकार योजना के क्रियान्वयन के तहत राज्यों का स्थान इस प्रकार है।
राज्य           स्थान         कार्य प्रतिशत
छत्तीसगढ़     पहला    89 %
तमिलनाडू     दूसरा     80 %
केरल            तीसरा    72 %

आईआईटी और सी.जी नेट फाउंडेशन ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की शिक्षा स्तर को बढ़ाने के लिए आदिवासी रेडियो एप लॉन्च किया गया है। इसके अंतर्गत हिन्दी.व अंग्रेजी भाषा तकनीक को गोड़ी भाषा में सुना जा सकता है। 

बायोफ्लांक तकनीक से पहली बार प्रदेश में मछली पकड़ा जाएगा। यह तकनीक ब्राजील से इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में प्रारंभ की जाएगी।

शिक्षकों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास मौखिक भाषा का विकास, वर्ण ज्ञान व लेखन के आयामों द्वारा
विशेष पढाई कराने के उद्देश्यों से रूम टू रीड कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसका उद्घाटन में
बस्तर विधायक कवासी लखमा द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

1 से 5 नवंबर 2019 को 7 वां मैनपाट (कार्निवाल) महोत्सव -2019 का आयोजन किया गया। जिसका.
शुभारंभ मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल द्वारा अंबिकापुर सरगुजा में किया गया।

छत्तीसगढ़ में आयोजित प्रमुख कार्यक्रम एवं उनके अतिथि

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा " अरपा पैरी के धार '' को छत्तीसगढ़ की राजकीय गीत के रूप में राज्योत्सव
कार्यक्रम के अवसर पर घोषित किया गया।

राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन 27 से 29 दिसंबर 2019 तक साइंस कॉलेज ग्राउंड, रायपुर में
किया गया। जिसका मुख्य अतिथि राहुल गांधी जी थे।

 35 वां चक्रधर समारोह -2019 का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा रामलीला मैदान, रायगढ़ में.
की गयी। यह सम्मान की आयोजन तिथि 02 सितंबर से 11 सितंबर 2019 तक थी।

गढ़िया महोत्सव का आयोजन 30 सितंबर से 06 अक्टूबर को कांकेर स्थित गढ़िया पहाड़ में मनाया गया। यह
गढ़िया पहाड़ कांकेर जिले में स्थित है।

प्रदेश में युवा महोत्सव कार्यक्रम 15 अक्टूबर 2019 से 14 जनवरी 2020 तक आयोजन किया गया। माननीय, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौरी-गौरा महोत्सव को राज्य स्तर पर मनाए जाने की घोषणा की।

भारत छोड़ों आंदोलन में प्रदेश की भूमिका

जब ब्रिटिश शासन ने गांधी जी की मार्मिक अपीलों की भी अपेक्षा की तब विवश होकर अखिल भारतीय कांग्रेस
कमेटी की बैठक बम्बई में बुलानी पड़ी। बैठक 7 और 8 अगस्त को मुम्बई में हुई, जिसमें देश के सभी प्रमुख
नेता उपस्थित थे। 

सबकी नजरें महात्मा गांधी की ओर लगी हुई थी जिनके हाथों में राष्ट्र ने अपना भविष्य सौंपा रखा था।

महात्मा गांधी के भारत छोड़ो प्रस्ताव पर्याप्त विचार  विमर्श किया पारित गया हुआ।। 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो का प्रस्ताव पारित हुआ। 

छत्तीसगढ़ के अनेक नेता मुंबई अदिवेशन में भाग लेने गए थे। इनमे पं. रविशंकर शुक्ल , पं. द्वारिकाप्रसाद मिश्र ,ठा. छेदीलाल बैरिस्टर,घनश्याम सिंह गुप्त , महंत लक्ष्मीनारायण दास, श्री यति यतनलाल, सेठ, शिवदास डागा थे। 

इस महत्वपूर्ण अधिवेशन वापस आते समय 11.8.42 को रात्रि मुख्यमंत्री 4 बजे मलकापुर स्टेशन में पं. रविशंकर शुक्ल (भू.पू. मुख्यमंत्री) पं. द्वारिकाप्रसाद मिश्र  (पूर्व स्वशासन मंत्री) ठा. छेदीलाल बैरिस्टर, महंत लक्ष्मीनारायण दास, श्री यति यतनलाल, सेठ, शिवदास डागा, श्रीनारायण राव जी, दुर्गा शंकर मेहता (पूर्व मंत्री मध्यप्रांत) गिरफ्तार कर लिए गए।

श्री पन्नालाल देवड़िया एवं उनकी धर्मपत्नी विधामती देवडिया को को रायपुर से लौटते समय गिरफ्तार कर
लिया गया। 

छत्तीसगढ़ आध्यक्ष घनश्याम के यशस्वी सिंह नेता गुप्त एवं बम्बई मध्यप्रांत से विधानसभा लौटते समय के
गिरफ्तार कर लिए गए।

राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं की गिरफ्तारी के बाद भारत छोड़ो का नारा हिन्दुस्तान के आसमान पर गूंजने
लगा।

यह आंदोलन देश के साथ-साथ सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में फैल गया। प्रत्येक शहर, तहसील, कस्ये, गांव-गांव,
सुदूरवर्ती वनो रियासतों जमींदारियों में समान रूप से विस्तारित हो गया। 

ब्रिटिश कालीन छत्तीसगढ़ के रायपुर बिलासपुर और दुर्ग जिले में अग्रणी नेताओं के नेतृत्व में आंदोलन आरंभ
हो गया।

1935 में भारतेन्दु साहित्य समिति की स्थापना बिलासपुर में की गई।

18 जनवरी 1941 को बिलासपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ विभाग हिन्दी साहित्य सम्मेलन में प्रथम अधिवेशन
के अध्यक्ष सरयु प्रसाद त्रिपाठी थे।

भारत छोड़ो आंदोलन में रायपुर की प्रमुख भूमिका

छत्तीसगढ़ में जैसे ही भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ। रायपुर जिले के स्वतंत्रता सेनानी सड़कों पर उतर गये।

छत्तीसगढ़ में भारत छोड़ो आंदोलन की घटना तथा संबंधित व्यक्ति।

1. 10 अगस्त 1946  को रायपुर में विद्यार्थियों का जूलूस-रणवीर सिंह शास्त्री
2. 2 अक्टूबर 1942 को बिलासपुर में विशाल जूलूस-भुवन भास्कर सिंह
3. 21 अगस्त 1948 को दुर्ग जिला कचहरी में आगजनी रघुनंदन सिंगरौल
4.9 सितंबर को नागपुर हाईकोर्ट भवन पर तिरंगा फहराना-ठाकुर रामकृष्ण सिंह ने।

Jun 20, 2020

ढोकरा आर्ट बस्तर छत्तीसगढ़ dhokra ancient art form bastar

ढोकरा के हर एक कला में कहानी छिपी हुई है यहाँ कलाकार प्रकृति से अपना इंस्पिरेशन लेते है। ये अपनी कला से कहानी बुनते है चाहे कितनी भी छोटी चीज हो उसमे कहानी उकेरी हुई होती है ये आर्ट फॉर्म बेहद जटिल है।
ढोकरा आर्ट बस्तर छत्तीसगढ़ dhokra ancient art form bastar
ढोकरा आर्ट बस्तर 

बस्तर छत्तीसगढ़ के ढोकरा आर्ट की पूरी जानकारी

क्या है ढोकरा आर्ट -

ढोकरा आर्ट विश्व के कुछ सबसे पुराने आर्ट फॉर्म में से एक है छत्तीसगढ़ में भी सभी लोगों को इस कला की जानकारी नहीं है इस शिल्प का काम बस्तर में किया जाता है इसकी शुरुआत 4000 साल पहले किया गया था इतिहासकारों के मुताबिक ढोकरा आर्ट हड़प्पा व मोहनजोदड़ो सभ्यता में भी पाए गए थे।

ढोकरा का इतिहास -

ढोकरा की कहानी कुछ ऐसी है की हमारे पूर्वज पेड़ के निचे बैठे हुए थे तभी पेड़ से मधुमख्हियों का वैक्स (bee wax) यानि मोम दीमक के भिंभोरा (termite hill) पर गिरा और धीरे धीरे पिघल कर एक आकृति में बदल गया इस घटना से वे बहोत प्रभावित हुए और यही से मोल्डिंग यानि ढलाई का कॉन्सेप्ट आया। ढोकरा आर्ट आज पुरे विश्व में प्रसिद्ध है और इन कला कृतियों को लंदन ,पेरिस ,न्यूयोर्क के स्टोर्स में देखा जा सकता है।

बनाने का तरीका -

इस आर्ट को बनाने के दो तरीके है पहला है मेटल कास्टिंग (metal casting) दूसरा है लॉस्ट वैक्स कास्टिंग (lost wax casting)और यह मेटल बनता है पीतल ,निकिल और जस्ता। इसको बनाने के लिए उस आकृति की सबसे पहले मिट्टी का ढांचा तैयार किया जाता है उसके ऊपर बी वैक्स का डिज़ाइन बनाया जाता है उसके ऊपर फिर से मिट्टी का परत चढ़ाया जाता है इसके बाद इस आकृति को धुप में सूखा दिया जाता है सूखने के बाद आग में इसे तपाया जाता है। आग में तपने से बी वैक्स पिघल जाता है तथा निश्चित आकृति प्राप्त हो जाती है।

बस्तर की हर कलाकृति अपने आप में कहानी समेटे हुई है। ढोकरा आर्ट देखने में जितना सुन्दर और अद्वितीय है उतना ही मुश्किल काम इसको बनाना है। ढोकरा आर्ट को पूरा बनाने में कलाकार को 6 -8 महीना लगता है।

छत्तीसगढ़ के गढ़वा और झारा जनजाति प्रमुख रूप से इस कार्य को करता है। इस आर्ट की अनोखी बात ये है की हर एक पीस बिना कोई जोड़ के एक ही पीस में बनाया जाता है। ढोकरा आर्ट बनाने की जो कला पुराने समय से चली आ रही थी वही आज भी उपयोग किया जाता है।