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सोंढूर बांध - जबरा ईको टूरिज्म | SONDUR DAM - JABRA ECO TOURISM

कोसारटेडा बांध बस्तर | KOSARTEDA DAM BASTAR

कोसारटेडा बांध बस्तर की पूरी जानकारी 

कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना बस्तर जिले का ही नही बल्कि बस्तर संभाग की सबसे बडी सिंचाई परियोजना है।2008 में बनकर तैयार हुए इस बांध का लोकार्पण 2009 में किया गया। बस्तर ब्लॉक स्थित बस्तर संभाग की सबसे बड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना कोसारटेडा निर्माण के दस साल के अंदर ही बहुउद्देशीय परियोजना बन गई है। बस्तर के आस पास पिकनिक स्पॉट के लिए ये जगह उपयुक्त है।

कोसारटेडा बांध बस्तर
कोसारटेडा बांध बस्तर


कोसारटेडा बांध बस्तर
कोसारटेडा बांध बस्तर
 कोसारटेडा बांध का निर्माण 2008 में पूरा हुआ था। नौ अगस्त 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और तत्कालीन सांसद दिवंगत बलीराम कश्यप ने इसका उद्घाटन किया था। वर्तमान में बांध के पानी से खेतों की सिंचाई के साथ ही बांध में मत्स्य पालन भी किया जा रहा है। कोसारटेडा बांध की सिंचाई क्षमता 11120 हेक्टेयर है।

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केशकाल के छिपे हुए जलप्रपात कुऐमारी, लिमदरहा,आमादरहा | KUYEMARI WATERFALL KESHKAL

केशकाल के छिपे हुए जलप्रपात कुऐमारी, लिमदरहा,आमादरहा  इस झरने के बारे में अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं है केशकाल से लगभग 20 km की दुरी पर स्थित  कुऐमारी जलप्रपात बहुत खूबसूरत है  यह 70 - 80 फीट ऊंचा है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ जंगलो के बीच कुऐमारी जलप्रपात शांति का अनुभव कराने वाला है। अगर आप जाने का प्लान बना रहे है और आपको वहां के रास्ते की जानकारी नहीं है तो सही मार्गदर्शन से जाये रास्ते आपको भटका सकते है क्योकि जंगलों वाला इलाका होने के कारण मोबाइल इंटरनेट सही से नहीं मिल पायेगा। इसके आस पास आपको और कई प्राकृतिक झरने देखने को मिल जाएगा बरसात के दिनों में यह जलप्रपात देखने लायक होता है अगर आप केशकाल आये है तो देखने जरूर जाना चाहिए।  केशकाल के आस पास आपको आमादरहा,मुक्तेखड्का,ऊपरबेदी,लिमदरहा,बावनीमारी के झरने भी देखने को मिल जायेगा।
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मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर | BILAI MATA MANDIR DHAMTARI

मां विंध्यवासिनी बिलाई माता मंदिर धमतरी की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी यानी बिलाई माता पर लाखों भक्तों की आस्था है। यहां चैत्र और क्वांर नवरात्र में हजारों की संख्या में श्रद्धालुजन जुटते हैं। शहर के अंतिम छोर पर दक्षिण दिशा में मां बिलाई माता का मंदिर है। किंवदती है कि मां विंध्यवासिनी की मूर्ति जमीन से निकली है, जो धीरे-धीरे ऊपर आती जा रही है। 
 माना जाता है कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देवी की मूर्ति स्वयं ऊपर उठी और आज की स्थिति में आई। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी देखने को मिलता है। पहले निर्मित द्वार से सीधे देवी के दर्शन होते थे। उस समय मूर्ति पूर्ण रूप से बाहर नहीं आई थी, किंतु जब मूर्ति पूर्ण रूप से बाहर आई तो चेहरा द्वार के बिल्कुल सामने नहीं आ पाया, थोड़ा तिरछा रह गया।
मूर्ति का पाषाण एकदम काला था। मां विंध्यवासिनी देवी की मूर्ति भी काली थी, लेकिन वर्तमान में रंगने के कारण मूर्ति वर्तमान स्वरूप में दिखाई देती है।1825 में चंद्रभागा बाई पवार ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
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बारसूर का जुड़वां गणेश मंदिर | TWIN GANESHA TEMPLE BARSUR

बारसूर का जुड़वां गणेश मंदिर की पूरी जानकारी  दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां विराजमान है भगवान गणेश की दो विशालकाय मूर्ति ऐसी महिमा है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 395 किमी दूर स्थित बारसूर के गणेश मंदिर की. बारसूर को तालाबों और मंदिरों का शहर कहा जाता है, जहां कभी 147 मंदिर हुआ करते थे. बारसूर का जुड़वां गणेश मंदिर छत्तीसगढ़  के बारसूर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। यहां वैसे तो काफी प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। लेकिन बारसूर केजुड़वां गणेश मंदिर शायद पूरी दुनिया में अनोखा है। इस मंदिर में दो गणेश प्रतिमा है। एक की ऊंचाई सात फ़ीट की है तो दूसरी की पांच फ़ीट है। इन मूर्ति के निर्माण में कलाकार ने बड़ी ही शानदार कलाकारी दिखाई है। इस बार इन मूर्तियों को देखकर भक्त इसको देखते ही रह जाते है। ये दोनों मूर्ति एक ही चट्टान पर बिना किसी जोड़ के बनाई है।


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